hindu dhram
दर्शन का अर्थ
भारतीय चिन्तन परम्परा में प्रयुक्त 'दर्शन ' का शाब्दिक अर्थ दॄष्टि है ! यह साधारण अर्थ में प्रयुक्त देखना से भिन्न हे ! व्यवहार में "दर्शन' करना ' और 'देखना ' दोनों का प्रयोग अलग -अलग सन्दर्भों में होता हे! भारतीय परिप्रेश्य में इसका अर्थ तत्त्व का दर्शन, तत्त्व ज्ञान अथवा तत्त्व का साक्षात्कार हे !
युक्तिपूर्वक तत्वज्ञान प्राप्त करने के प्रयत्न को ही दर्शन कहते हे ! फिलॉसोफी शब्द ग्रीक भाषा के दो शब्दो से बना हे! इन्हे क्रमशः 'फिलॉस ' और 'सोफिया ' कहते है ! 'फिलॉस ' शब्द ग्रीक भाषा में प्रेम अथवा अनुराग में किया जाता हे ! इसी प्रकार 'सोफिया का अर्थ ज्ञान या विवेक के सन्दर्भ में किया जाता हे !
पश्चिम में 'फिलॉसोफी का प्रयोग इसी नॉलेज अथवा विवेक के प्रति बुद्धिक प्रेम के अर्थ में किया गया हे ! पश्चिम में कोई परिभाषा नहीं हे ,क्योकि प्रचीनकाल से लेकर बीसवीं शताब्दी तक वहाँ दार्शनिक चिंतन का स्वरुप और लक्ष्य, विभिन्न युगो व परिस्थियों के अनुसार बदलता है ! इसके फलस्वरूप वहाँ इसका प्रयोग तत्त्वमीमांसा,ज्ञानमीमांसा, मूल्यमीमांसा ,विश्लेक्षण, द्वितीय कर्म की गवेषणा अदि के सन्दर्भ व अर्थ में किया जाता हे
दर्शन का स्वारूप
भारतीय दर्शन में तत्त्व साक्ष्यतकार का लक्ष्य मानव जीवन के समस्त दुखों की आत्यंतिक निवृत्ति
हे! संखयकारिका में वर्णित हे कि "दुख त्रयाभिधाता जिज्ञासा तदपदयात " कहें तो अर्थात आधिदैविक, अधिभूतिक,और आध्यात्मिक दुखो से निवृति के के लिए दार्शनिक जिज्ञासा करनी चाहिए !यह दार्शनिक जिज्ञासा हे !
भारतीय दर्शन उस विवेक की खोज हे जिसको जान लेने से जो आज्ञेत है, वह सब नॉलेज हो जाता हे ! इस दॄष्टि से दर्शन अशेष नॉलेज या सम्यक नॉलेज है जिसको जान लेने से अज्ञात है , यह सब नॉलेज हो जाता है और जानने के लिए कुछ भी शेष नहीं रहता है !
यह दार्शनिक जियासा है तत्त्व साक्षात्कार , ब्रह्मविद्या, निर्वाण , सम्बोधि मोक्ष, अपवर्ग आदि के साक्षत्कार या विवेक के लिए 'दर्शनशस्त्र ' का प्रयोग किया जाता है !
हिन्दू धर्म
हिन्दू धर्म क्या है, क्या है अवधरणा और महत्व पर निबंध
हिन्दू धर्म को विश्व का सबसे प्रचीन धर्म माना जाता है ! हिन्दू शब्द की उत्पति भारत की प्रमुख सभ्यता प्रमुख नदी भारत के प्रहरी हिमालय के नाम से मिलाकर मानी जाती है ! इस धर्म को सनातन कहा जाता है ! जनसख्या के मामले में हिन्दू दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा धर्म है ! जिसके अनुयायी एशिया सख्या में पाए जाते जाते है ! नेपाल और भारत एक हिन्दू बहुल देश है !
उद्धव एव विकास : धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस धर्म की उत्पत्ति के पूर्व हुई थी इस धर्म का प्रारंभ स्वयंभुव\ मनु के काल में हुआ था ! हालांकि एतिहस्की साक्ष्यों के अनुसार इस धर्म की उत्पत्ति का प्रारंभ होता है ! फिर क्रमश : अब तक 7 मनुओं के कार्य चलता रहा ! श्रीराम के काल में गुरु वशिष्ठ , विश्वमित्र , ऋषि पराशर ने इस धर्म को पुन्हा स्थापित किया ! इसके बाद रविदास नानक, तुलसीदास गोस्वामी , माधवाचार्य , महर्षि अरविन्द , कृष्ण परमहंस, स्वामी विवेकानंद , स्वामी रामतीर्थ , महर्षि अरविन्द , कृष्ण परमहंस , स्वामी विवेकानद , स्वामी आदि ने इस धर्म के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया !
शाखाए : हिन्दू धर्म वट वृक्ष के समान है जिसकी सेकड़ो शाखाए है ! उतने ही देवी , देवता है और उन सभी देव --देवताओं को मानने वाले लोगों की संख्या बहुत बड़ी है हिन्दू धर्म में त्रिदेवों को खास महत्व दिया गए गया है ये त्रिदेव है ब्रह्मा, विष्णु, महेश है !
अवधरणा : हिन्दू धर्मं वेद पर आधरित धर्म है जो आत्मा की अमरता में विश्वास रखता है हिन्दू धर्म मानता है कि ईश्वर एक ही है परंतु दुसरे धर्मो की अपेक्षा हिन्दू धर्म में एकेश्वरवाद का सिद्धाँत बातये है ! पुरुषार्थो , चार आश्रमों और पंच ऋण बताए है ! हिन्दू धर्म में हर व्यक्ति या आत्मा का अंतिम लक्ष्य माना गया है ! `यह धर्म सर्वधर्म समभाव , उदारता , सहिषुणता , स्वीकार्यता की भावना पर जोर देता है !
सरस्वती
हिन्दू धर्म प्रकृति औऱ ब्रह्मा , स्त्री या पुरुष को भिन्न नहीं मानता है !सभी आत्मरूप है ! प्रकृति के आठ तत्व है
जिससे सृष्टि की रचना , उद्धव, विकास औऱ सहार होता है ! हिन्दू धर्म में ब्रह्मा को जन्मदाता और शिव को सहारक माना गया है !
हिन्दू धर्म वसुधैव कुटुंबकम में विश्वास रखता है ! अर्थात संपूर्ण मानव जाति एक ही कुटुंब की है ! हिन्दू धर्म में साकार और निरकार दोनों ही तरह की पूजा पद्धति है ! अर्थात मूर्तिपूजा भी है हिन्दू
उपासना पद्धति में प्रकृति और पुरुष की समान रूप से भागीदारी है ! हिन्दू धर्म में जैसे सरस्वती ब्रह्मा , लक्षमी -विष्णु , उमा -शंकर , सीता -राम , राधे !
महत्व :; हिन्दू धर्म की आध्यत्मिक उन्नती पर विश्वास रखता है इसीलिए यह धर्मं मोक्ष दर्शन पर आधारित है यह धर्म मोक्ष जीवन इसके ;लिए ६४ कला और १६ प्रकार की विद्याओं का विस्तार से वेद और पुराणों में वर्णन मिलता है यह धर्म अनुशासन और कर्त्यव्य पालन पर जोर देता है ! सभ्य मनुष्य बनाता है ! इसीलिए चार पुरुषार्थ और आश्रम के महत्व को समझाया गया है ! प्रकृति से निकटता और जागरण इस धर्म का मूल है ! हिन्दू धर्म में १६ संस्कार, व्रत -उपवास , तीर्थ -पुण्य ,वेद्द -गीता पाठ आदि के अनुसार ही जीवन यापन करने का खास महत्व है !
खास बातें : इस धर्म का धर्मग्रंथ :
उपनिषद और गीता वेदो का सार है इसे भारत का ६ दर्शन कहते है ! १० सिद्धांत है षट कर्म का सिद्धांत २। आत्मवाद का सिद्धांत ५ आत्मा की अमरता का सिद्धांत , ६. ब्रह्मा का सिद्धांत ९. व्रत और संध्यावंदन का सिद्धांत १०, अवतारवाद का सिद्धांत
जो जीवन जीने की स्वतंत्रता , वक्तिगत व उन्नति और आत्मिक विकास पर जोर देता है यह धर्म बहुजाति।, अनेक प्रार्थना , साधना और देवी -देवताओ , अनेक आध्यात्मिक मार्गो और अनेक दर्शनों से सजा धर्म है जो अपने मूल में आध्यात्मिक एक ही है यह धर्म हजारों वर्ष से अस्तित्व में है हिन्दू धर्म निरंतर है पहले इसे सनातन धर्म कहा जाता था जो वैदिक धर्म पर आधारित है जिसकी उत्पति ऋगवेद से हुई है !
संदर्भ
किताब का नाम
यू जी सी
नेट / जे / आर / एफ / स्लेट
जूनियर रिसर्च फ़ेलोशिप तथा लेक्चररशिप हेतु राष्ट्रीय एव राज्य स्तरीय पात्रता परीक्षा
दर्शनशस्त्र
प्रकाशन अरिहंत प्रकाशन
लेखक
करनैल सिंह
सन्दर्भ :
इंटरनेट इनफार्मेशन हिन्दू धर्म
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